Friday, July 24, 2009
Thursday, July 23, 2009
प्रकृति के विभिन्न रंग
essence of nature दिवा के बाद मेरा दूसरा ब्लॉग है। इसमें मैंने प्रकृति को अपनी दृष्टिसे देखने का और उसे एक अपने आस-पास के मित्रों को दिखाने का, एक छोटा-सा प्रयास किया है। मेरे गूगल के मित्र यदि मेरे इस दुस्साहस को अपना सकें और मुझे प्रकृति को और समझ सकने में प्रोत्साहित कर सकें तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा।
एस्सेंस ऑफ़ नेचर प्रकृति के जड़ और चेतन -दोनों स्वरूपों के सुंदर और असुंदर रंगों का समन्वय है। प्रकृति जड़ और चेतन का एक विशद आगार है जिसे ईश्वर ने अपने हाथों से रचा है। इसमें जड़-चेतन, सुंदर-असुंदर, सृजनात्मक और विद्ध्वंसत्मक समस्त शक्तियाँ एवं स्वरूप समाहित हैं।
अनादि काल से बड़े-बड़े ऋषि-मुनि, विचारक, शास्त्रकार और वैज्ञानिक प्रकृति के जड़-चेतन स्वरूप को देखने, समझने और जानने के लिए तरह-तरह के प्रयास में रत हैं । आज भी प्रकृति की अनंत रहस्यमयी गुत्थियाँ मानव को अपनी ओर सम्पूर्ण शक्ति के साथ आकृष्ट करती रहती हैं। मनुष्य की जिज्ञासु प्रवृत्ति उसे सदैव और जानने के लिए प्रेरित करती रहती है।
मैं भी अपने आप को -प्रकृति को ,समझने का एक छोटा-सा प्रयास करना चाहती हूँ। थोड़े -से शब्दों और नाममात्र के चित्रों के साथ , गूगल के ब्लॉग को माध्यम बना कर , मैं आपके साथ प्रकृति के विविध रंगों को देखना और अपनी नजर से आपको दिखाना चाहती हूँ।
एस्सेंस ऑफ़ नेचर प्रकृति के जड़ और चेतन -दोनों स्वरूपों के सुंदर और असुंदर रंगों का समन्वय है। प्रकृति जड़ और चेतन का एक विशद आगार है जिसे ईश्वर ने अपने हाथों से रचा है। इसमें जड़-चेतन, सुंदर-असुंदर, सृजनात्मक और विद्ध्वंसत्मक समस्त शक्तियाँ एवं स्वरूप समाहित हैं।
अनादि काल से बड़े-बड़े ऋषि-मुनि, विचारक, शास्त्रकार और वैज्ञानिक प्रकृति के जड़-चेतन स्वरूप को देखने, समझने और जानने के लिए तरह-तरह के प्रयास में रत हैं । आज भी प्रकृति की अनंत रहस्यमयी गुत्थियाँ मानव को अपनी ओर सम्पूर्ण शक्ति के साथ आकृष्ट करती रहती हैं। मनुष्य की जिज्ञासु प्रवृत्ति उसे सदैव और जानने के लिए प्रेरित करती रहती है।
मैं भी अपने आप को -प्रकृति को ,समझने का एक छोटा-सा प्रयास करना चाहती हूँ। थोड़े -से शब्दों और नाममात्र के चित्रों के साथ , गूगल के ब्लॉग को माध्यम बना कर , मैं आपके साथ प्रकृति के विविध रंगों को देखना और अपनी नजर से आपको दिखाना चाहती हूँ।
Thursday, July 2, 2009
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